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कुशल रणनीति जरूरी है विश्व कप के लिए ---दिलबाग विर्क

Written By Dilbag Virk on शनिवार, 19 फ़रवरी 2011 | 7:41 am

10 वें विश्व कप का विधिवत उदघाटन हो चुका है . भारतीय टीम बंगलादेश के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी . इस मैच को बदले के मैच के रूप में प्रचारित किया जा रहा है क्योंकि बंगलादेश ने 2007 के विश्व कप में भारत को हराकर विश्व कप से बाहर करवा दिया था . अब ऐसी स्थिति नहीं है . जीत-हार से विशेष अंतर नहीं पड़ने वाला क्योंकि दोनों टीमों के पास इसके बाद भी पाँच मैच होंगे और वापिसी का पूरा मौका होगा .
                    रैंकिंग के हिसाब से देखा जाए तो बंगलादेश विश्व की अन्य प्रमुख टीमों के मुकाबले में थोड़ी कमजोर टीम है .  हालाँकि उसने हाल ही में न्यूज़ीलैंड को 4 - 0 से हराकर अपनी मजबूती दिखाई है फिर भी वह भारत के मुकाबले की नहीं है . 10 में से 9 बार भारत के जीतने की संभावना है , ऐसे में भारतीय टीम के लिए डर की बात नहीं है . भारत को सिर्फ अपने स्तर के अनुकूल प्रदर्शन करना है . अभ्यास मैचों में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है . अगर वे उसी प्रदर्शन को दोहरा पाए तो बंगलादेश को ही नहीं अन्य प्रमुख टीमों को भी मुश्किल होने वाली है . हाँ , अभ्यास मैचों की तरह सभी खिलाडी यहाँ नहीं खेल पाएँगे . अंतिम ग्यारह का चयन बड़ी चतुराई से करना होगा . रैना का अंतिम ग्यारह में आना मुश्किल लग रहा है . भारतीय टीम छह बल्लेबाज़, एक विकेटकीपर और चार गेंदबाज़ के साथ खेलना चाहेगी . ओपनिंग सचिन-सहवाग करेंगे . इसके बाद कोहली , धोनी , युवराज़ , पठान का क्रम होना चाहिए .गेंदबाजों के रूप में हरभजन , जहीर , नेहरा और मुनाफ को रखा जा सकता है .
               रणनीति के मामले में भी कुछ प्रयोग की जरूरत है , विशेषकर पावर प्ले को लेकर . दूसरा पावर प्ले फील्डिंग टीम ने लेना होता है . इसे सामान्यत: 11 से 15 ओवर तक ले लिया जाता है . यदि गेंदबाज़ विकेट ले रहे हों तो इसे इस समय ले लेने में कोई हर्ज़ नहीं लेकिन यदि बल्लेबाज़ जमे हुए हों तो उन्हें लाभ देने का कोई औचित्य नहीं . ऐसे में एक विकेट गिरने का इंतजार करना चाहिए . विकेट गिरते ही पावर प्ले लेने से नए बल्लेबाज़ को प्रहार करने का मौका नहीं मिलेगा . तीसरे पावर प्ले को भी कई बार बहुत पीछे खींच लिया जाता है . पहले बल्लेबाज़ी करते समय इसे उन ओवरों में लिया जाना चाहिए जब बल्लेबाज़ पूरी तरह से जमे हुए हों .
             1996 के विश्व कप में श्रीलंका का जयसूर्या से ओपन करवाना ऐसा फैसला था जिसने अन्य टीमों को बैकफुट पर ला दिया था . 2011 के विश्व कप में भारत को भी कुछ नया करना चाहिए . पावर प्ले का चतुराई से इस्तेमाल होना , बड़े स्कोर का पीछा करते समय हरभजन को पिंच हिटर के रूप में इस्तेमाल होना अन्य टीमों को अचंभित कर सकता है . कुशल रणनीति भी उतनी ही जरूरी होती है जितना की मैदान में प्रदर्शन . उम्मीद है बंगलादेश के खिलाफ भारतीय टीम इन दोनों क्षेत्रों में खरी उतरेगी . 

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