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'ममता महान क्यों ?' एक संवाद महान ममता मंडल से ANWER JAMAL

Written By DR. ANWER JAMAL on रविवार, 27 फ़रवरी 2011 | 6:43 am

महान ममता मंडल की स्थापना एक स्वागत योग्य क़दम है । हिंदी ब्लाग जगत में यह अभूतपूर्व है लेकिन हिंदी ब्लाग जगत के नर-मठों के कर्मठों की ओर से इसे नज़र अंदाज़ कर दिया गया क्योंकि उनका मानना है कि अच्छा काम केवल हम कर सकते हैं या फिर यूं कह लें कि जो काम वे करते रहते हैं , उनकी नज़र में बस वही काम अच्छा है । जब ये अपने वर्ग के ही सदस्यों की, दूसरे पुरुषों के अच्छे कामों की सराहना से बचते हैं तो ये नारी की कुर्बानियों को क्या समझ पाएँगे ?
भूख जब बच्चों की आँखों से उड़ा देती है नींद
रात भर क़िस्से कहानी कह के बहलाती है माँ

सबकी नजरें जेब पर हैं , इक नज़र है पेट पर
देख कर चेहरे को हाले दिल समझ जाती है माँ

.....और यही वजह है कि ममता महान है और ममता के कारण ही नारी भी महानता की उन ऊँचाइयों पर है कि उसके सामने मर्द की बड़ी से बड़ी ऊँचाई सिर्फ गहराई ही नज़र आती है ।

वंदना गुप्ता जी को इस ब्लाग का चार्ज देकर और महान ममता मंडल की स्थापना करके मेरी नज़र में जनाब सलीम ख़ान साहब ने एक ब्लाग प्रवर्तक का दर्जा हासिल कर लिया है ।
अब अगर किसी को विरोध करना है तो वह जल्दी से अपना विरोध दर्ज करा दे अन्यथा वह सहमत समझ लिया जाएगा ।
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5 टिप्पणियाँ:

शालिनी कौशिक ने कहा…

विरोध में बस यही कहना है कि मात्र स्त्री शक्ति को ही आगे बढ़ाना लक्ष्य न होकर योग्यता को आगे बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चलें तो शायद इसमें ब्लॉग जगत की सफलता होगी...

हरीश सिंह ने कहा…

shalini ji ne sahi kaha..... nari samman uchit.. par yah "" mahila mukti morcha nahi hai"

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (28-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ शालिनी जी ! जिन महिलाओं को आप President के पदों पर देख रही हैं वे यहाँ तक अपनी योग्यता के बल पर ही पहुँची हैं । आज तक उनकी प्रतिभा को उनका जायज़ मक़ाम न मिल पाया था ।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

@ हरीश जी ! देखना जल्द ही आपको पुरुष मुक्ति मोर्चा बनाने की नौबत आ जाएगी। समय रहते ममता की शक्ति को पहचान लीजिए और उसे स्वीकार कर लीजिए ।

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