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अजूबा केसा

Written By Akhtar khan Akela on शनिवार, 26 फ़रवरी 2011 | 10:13 am

कुछ अजूबे ऐसे भी ..
दोस्तोंयह मेराभारत महान हेयहाँ कुछ अजूबेइस अजायब घर में ऐसे भी हेंजिन्हें देख करलोग हंसते हेंजिनकी कार्यशेली और दिनचर्या कोलोगमुर्ख की कार्यशेली कहते हेंहाँ दोस्तों में सही कहता हूँआज जो लोगअपना काम वक्त परकरते हेंजो सरकारी कर्मचारीवक्त पर दफ्तर जाते हेंवक्त पर पत्रावलियों में काम करते हेंजो लोग रिश्वत नहीं लेतेजो लोग बिना किसी सिफारिश केसभी का काम कर देते हेंजो लोग देश के लियें जीते हेंजो लोग देश के कानून का सम्मान करते हेंजो लोग एकता अखंडता की बात करते हेंजो लोग साम्प्रदायिक सद्भावभाईचारे की बात करते हेंहाँ दोस्तों बस यही लोगइन दिनोंदेश के करोड़ों करोड़ लोगों कोअजूबे सेमुर्ख और पागल से लगते हेंक्या हम मुर्ख हेया हम लोगों की तरहऐसे लोगों को मुर्ख कहने वालों की टीम में शामिल हेजरा सोचें चिन्तन करेंऔर हो सके तोमेरी तरह अजूबा मेरी तरह मुर्ख बनने की कोशिश करें ।अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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3 टिप्पणियाँ:

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

अख्तर भाई,

ऐसे अजूबे मूर्ख, जीवन में असफल और समय से बहुत पीछे रहने वाले होते हैं. वे अपनी आत्मा से संतुष्ट होते हैं, वे कुछ लोगों द्वारा सराहे भी जाते हैं लेकिन बाद में कभी वक्त पड़ने पर अकेले खड़े होते हैं. तब सोचते हैं कि हमने भी औरों की तरह से सोचा होता तो आज इस तरह से इस दोराहे पर अकेले न होते. क्या कहेंगे आप ऐसे चंद लोगों को? हाँ बस ये कह कर सुखी हो लेते हैं की आत्मा पर कोई बोझ तो नहीं - कभी बेईमानी नहीं की, रिश्वत नहीं ली, सताया नहीं, मानवता के मिसाल कायम की और रात में नीद भी अच्छी आती है कोई तनाव या बोझ नहीं.

वन्दना ने कहा…

अख्तर जी अजूबा बनना भी हर किसी की किस्मत मे नहीहोता…………हम अजूबे ही अच्छे खुद से नज़र तो मिला सकते हैं।

शालिनी कौशिक ने कहा…

अख्तर खान जी

सच कहा आपने,आज सच्चे ईमानदार लोगों को मूर्ख ही कहा जाता है.

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