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Written By Akhtar khan Akela on सोमवार, 28 फ़रवरी 2011 | 8:37 am

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का अपमान

देश में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष बालकृष्ण के रिश्तेदारों पर काले धन के आरोपों के बाद इस मान सम्मान को बचाने के लियें देश के सभी शीर्ष लोग उन्हें इस्तीफे की सलाह दे रहे हें इस सलाह देने वालों में खुद सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश भी शामिल हें ।
वेसे तो इस मामले में सारे कुए में भांग घुटी हे इसलियें सलाह देने का नेतिक अधिकार किसी को भी नहीं हे लेकिन जो आरोप लगते हें अगर उन्हें साबित नहीं किया जाता हे और केवल अफवाहों के आधार पर नेतिकता की बात की जाती हे तो ऐसी राजनितिक नेतिकता से देश का भला होने वाला नहीं हे अगर ऐसा होता रहा तो देश में इस्तीफों का सिलसिला चल जाएगा क्योंकि देश के इस हमाम में हर शख्स नंगा बेठा हे । बालकृष्ण अकेले से नेतिकता की बात करने वाले जरा येह बताएं के क्या औन्होने कभी प्रधानमन्त्री जी से यह बात कही हे क्या उन्होंने कभी किसी धर्म गुरु कभी किसी योग गुरु से यह बात कही हे क्या किसी ने किसी अधिकारी किसी खिलाड़ी से यह बात कही हे थोमस का मामला तो जग ज़ाहिर हे तो दोस्तों सो कोल्ड नेतिकता की बात ठीक नहीं हे फिर निजी स्वार्थों के खातिर किसी की टोपी उछालना यहाँ आम बात हे सारा देश जानता हे के इन दिनों मानवाधिकार आयोग को पंगु बना दिया गया हे और इस आयोग की प्रासंगिकता ही खत्म हो गयी हे कोन लोग इस आयोग के पद के लियें दावेदार हें यह भी किसी से छुपा नहीं हे सब जानते हें के अगर बालकृष्ण हटे तो दुसरा कोन इन्तिज़ार में हे के यह ताजपोशी उसके नाम हो , अमेरिका ने इराक पर जेविक हथियार के आरोप लगाये इराक को तबा कर दिया गया सद्दाम को फंसी दे दी गयी विश्व खामोश तमाशा देखता रहा लेकिन आज तक जेविक हथियार जो इराक पर हमले की बुनियाद थे वोह नहीं मिल पाए हे तो जनाब पदों से हटाने और उन पर लगाने के मामले में आरोप लगाकर नेतिकता की बात पुराणी हो गयी हे अब तो सबूत बाज़ार में लाओ जिसे चाहो ह्त्वाओं का सिद्धांत चल गया हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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