नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

Home » » दीपक और बाती

दीपक और बाती

Written By Alokita on मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011 | 7:04 pm



























पूछा था उसने
क्या होता है प्रीत ?
कैसा होता मनमीत ?
जवाब मिला
दिए बाती सी प्रीत कँहा ?
दीपक से बढ़ मनमीत कँहा ?
दिए बिन बाती का अस्तित्व मिट जायेगा |
बाती बिन,भला दीपक कँहा जायेगा ?
उस बाती को भी मिल गया एक दीपक ,
और दीपक की हो गयी वह बाती |
प्रेमाग्नि में जलने लगी बाती |
सबने देखा जल उठा है दीपक |
खुश थी वह दीपक की आगोश में जाकर |
चमक रही थी घृत प्रेम का पाकर |
प्रेम घृत का कतरा भी जब तक मिलता रहा ,
जलने का सिलसिला तब तक चलता रहा |
जल कर राख़ हो चुकी थी बाती ,
पर दीपक अब भी तो नवेला था |
मिट चुकी थी उस पर एक बाती ,
दूसरी के लिए वह फिर से अकेला था |
नयी बाती को ह्रदय में बसाया ,
फिर से प्रेम का ज्योत जलाया |
तेज़ हवा का एक झोंका आया ,
ज्योत प्रेम का टिक न पाया |
ह्रदयवासिनी अब भी थी बाती ,
घृत प्रेम का भरा पड़ा था |
जीवन में फिर भी अँधेरा था ,
बाती थी, दीपक फिर भी अकेला था |
दिए बाती में सच्चा प्रीत कँहा ?
हाँ इनमें सच्चा मनमीत कँहा ?
Share this article :

1 टिप्पणियाँ:

Dr. shyam gupta ने कहा…

वर्तनी की अशुद्धियों व हिन्दी-लिन्ग शब्दों पर ध्यान दें.... वैसे प्रेम की भ्रमित-भाव कहानी है...

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your valuable comment.