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बढ़कर चढ़कर विजय तिरंगा छाती पर फहरा दो !!

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on शनिवार, 7 मई 2011 | 9:51 am


वीर अमर हे ! मातृ भूमि को 

दुश्मन जो ललकारे 
पल में धूल चटा दो उसको 
फिर ना पलक उघारे 
वीर अमर हे ! मातृ भूमि को ---

वैभवशाली  देश हमारा 
विश्व गगन पर छाया 
भूखा गजनी गोरी आया 
सब ने मुह की खाया 
वीर अमर हे ! मातृ भूमि को ---

काया अपनी बहुत बड़ी 
पृथ्वी सारा परिवार 
मंगल चिंतन की कड़ी-झड़ी 
माने सारा संसार 
वीर अमर हे ! मातृ भूमि को ---

हरी भरी  बगिया है अपनी 
रंग विरंगे फूल 
मन की माला एक यहाँ की 
सपने में ना भूल !!
वीर अमर हे ! मातृ  भूमि को ...

मेरा अंग न काटो भाई 
दर्द हमें भी होता 
आँख अगर जो लाल हो गयी 
तो तांडव भी होता 
वीर अमर हे ! मातृ  भूमि को ...

न्यूट्रान- परमाणु- न शक्ति 
कुछ इतिहास- दिखा दो 
बलिदानी जत्थों की भक्ति 
पौरुष ,धैर्य गिना दो 
वीर अमर हे ! मातृ  भूमि को ...

भारत माँ हैं दुर्गा चंडी 

रण - भेरी जब बाजे 
खून गिरे ना-मुंड माल -ही 
ब्रह्म भी सारा काँपे 
वीर अमर हे ! मातृ  भूमि को ...

पृथ्वी -अग्नि रंग विरंगा 
वश में- सब- दिखला दो 
गजनी -गोरी- अभी मिले तो 
आसमान-में ही उनको 
काट -काट- बिखरा दो !!
(photo with thanks from other source)
ध्यान रहे- वो -अंग कहीं 
धरती- अपनी - ना -गिर जाएँ 
उन्हें भेज दो- वापस -या -तो 
काले पानी में दफना दो !!
हुँकार करते घुस जाओ 
बढ़कर चढ़कर विजय तिरंगा 

छाती पर फहरा दो !!

वीर अमर हे ! मातृ  भूमि को
 दुश्मन जो ललकारे .......

(photo with thanks from other source)


सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५ 
७.५.२०११ 
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2 टिप्पणियाँ:

prerna argal ने कहा…

काट -काट- बिखरा दो !!
(photo with thanks from other source)
ध्यान रहे- वो -अंग कहीं
धरती- अपनी - ना -गिर जाएँ
उन्हें भेज दो- वापस -या -तो
‘काले पानी’ में ‘दफना’ दो !!
हुँकार करते घुस जाओ
बढ़कर चढ़कर विजय तिरंगा
बहुत अच्छी देश-भक्ति से भरी भावपूर्ण रचना /बधाई आपको /
मेरे ब्लॉग में भी आइये और मार्गदर्शन देते हुए सन्देश भेजिए .धन्यवाद /

akhtar khan akela ने कहा…

vaah jnab vaah mzaa aa gyaa hmare dil ki baat likh dali jnaab ne bdhaai ho . akhtar khan akela kota rajsthan

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