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षटपदीय ----- दिलबाग विर्क

Written By Dilbag Virk on सोमवार, 9 मई 2011 | 12:45 pm

बच्चे कागज़ बीनते , भूखे  औ' लाचार
मांग रहे हैं आज भी , रोटी का अधिकार .
रोटी का अधिकार , ना दिला पाया कोई
पढने की यह उम्र , यहाँ गलियों  में खोई .
देश के कर्णधार , करें हैं दावे कच्चे
रोटी से हैं दूर , गरीब मासूम बच्चे .

                  * * * * *
                     साहित्य सुरभि
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3 टिप्पणियाँ:

kkk ने कहा…

बेबाक रचना..................

pratibha ने कहा…

कड़वा सच.....

वन्दना ने कहा…

कटु सत्य्।

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