नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

Home » , » बात उस दिन की है

बात उस दिन की है

Written By Pappu Parihar on बुधवार, 3 अगस्त 2011 | 8:04 am

बात उस दिन की है,
जब आँख पहली बार मिली थी,
हाँ वो अपनी सहेली के संग थी,
कनखियों से देख रही थी,
आगे को चल रही थी,

फिर उसके बाद सिलसिला सा शुरू हो गया,
मैं उसके पीछे दीवाना सा हो गया,
रोज़ उसी सड़क पर आना-जाना हो गया,
अब तो नैनो से नैन बतियाना हो गया,

आखों ने जब पड़ ली आखों की बोली,
फिर एक दिन वो बोली,
जरा इधर तो आओ,
कोन हो बताओ,

आज में तुम्हारी शिकायत भाई से करती हूँ,
घूरते हो तुम मुझे, तुम पर न मरती हूँ,
मेरा तो कोई और है,
तुम से पुरजोर है,

जला रही है, समझ गया,
इम्तिहान का वक्त है, समझ गया,
उससे कुछ न बोला,
अपना मुंह न खोला,

हंल्का सा मुस्कुरा दिया,
एक तरफ चल दिया,
उसे कुछ वक्त दिया,
आज न कुछ किया,

बस हम निकल लिए,
अपने दिल को थाम लिए,
अब उसकी बैचैनी थी,
रोज़ राह पर नैनी थी,

कुछ दिन निकल गए,
उसके अरमाँ मचल गए,
सही ये वक्त था,
मैं कुछ सख्त था,

उससे अनजान अपनी राह चला,
उसे देखे बिना अनमना चला,
वो अब भी चल रही थी,
अपनी राह छोड़, मेरी राह पर चल रही थी,

पीछे से उसने, हाथ पकड़ा,
दिया मुझे एक, लफड़ा,
यूँ वो लिपट गयी,
सरे बाज़ार यूँ पट गयी,

.
Share this article :

4 टिप्पणियाँ:

vidhya ने कहा…

वाह बहुत ही सुन्दर
रचा है आप ने
क्या कहने ||

Anil Avtaar ने कहा…

Waah! Pappu Ji aapke prastutikarn ke hum kaayal ho gaye...

Anil Avtaar ने कहा…

Waah! Pappu Ji aapke prastutikarn ke hum kaayal ho gaye...

Neeraj Dwivedi ने कहा…

Wah bhai .. Puri prem kahani hi likh di.

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your valuable comment.