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सुदामा कृष्णा की दोस्ती भुलाकर हम विदेशियों की दोस्ती की बात करते हैं और खुद को शर्मसार करते हैं

Written By Akhtar khan Akela on रविवार, 7 अगस्त 2011 | 9:09 pm


दोस्तों आज में हेरान और परेशान हूँ आज सुबह से सभी हैप्पी फ्रेंडशिप दे मना रहे है एक दुसरे को संदेश और झंसेबाज़ी दे रहे हैं मन में क्या है लेकिन सन्देश में एक दुसरे के लिए प्यार और दोस्ती की तड़प बता रहे हैं ..बच्चे हैं के शोक में एक दुसरे को फ्रेंडशिप बेंड बाँध रहे हैं ...........देश में अब विदेश की कई बातों का असर खूब आ गया है फ्रेंड शिप दोस्तों ने मनाया हो या ना मनाया हो लेकिन फ्रेंडशिप बेंड और फ्रेंडशिप गिफ्ट बनाने वालों के साथ साथ मोबाइल मेसेज कम्पनियों के मज़े हो गए हैं और आज के दिन उन्होंने करोड़ों करोड़ रूपये हमारे देश के भोले भाले जज्बाती लोगों से कमा लिए हैं .......दोस्तों फ्रेंड शिप दे जो यु के में १९३५ में एक अपराधी को जब वहां के पुलिस ने अगस्त के प्रथम शनिवार को म्रत्युदंड दिया तब उसके एक मित्र ने अपने म्र्तक दोस्त की याद में दुसरे दिन जज्बाती होकर आत्महत्या कर ली और जान दे डाली बस यु के के लोगों को एक दोस्त का दोस्त के लियें जान देने का यही अंदाज़ पसंद आया और जब से ही अगस्त महीने के पहले रविवार को फ्रेंडशिप दे मनाने की घोषणा कर दी ..आर एस एस और भाजपा के लोग जो स्वदेशी आन्दोलन की बात करते हैं गाँधीवादी लोग जो चरखे और खादी की बात करते हैं वोह सभी इस रंग में बस गए हैं ......दोस्तों में नहीं समझता इस दिन को हमारे लियें मनाना गर्व की बात हो लेकिन हाँ दोस्ती की मिसाल हमारे देश में क्रष्ण सुदामा और ना जाने कितने लोग रहे हैं हम हमारे देश में उन लोगों को याद  करके कभी भी उनके नाम पर कोई दिवस नहीं मनाते और इसीलियें हम हमारे देश हमारी संस्क्रती से दूर होते जा रहे हैं और नतीजे घर घर बिखरते परिवारों के रूप में देखने को मिल रहे हैं एक व्यक्ति सडक पर घायल पड़ा रहता है तड़प तड़प कर इलाज के आभाव में जान दे देता है लेकिन मानवता के नाते कोई उसे अस्पताल लेजाने की जुर्रत नहीं करता एक आदमी चाकू की नोक पर सरेआम एक लडकी को उठा कर लेजाता है उसके साथ बलात्कार करता है लेकिन उसे बचने के लियें कोई स्वदेशी नहीं आता .चलो तात्कालिक रूप से बचाना मुश्किल भी हो अगर तो उस अपराधी के पकड़े जाने  पर उसे सजा दिलवाने के लियें कोई भी खुलकर अदालत में ब्यान नहीं देता है ऐसे न जाने कितने किस्से हैं जो हम और हमारे देश वासी राष्ट्रहित में पूरा नहीं करते हैं लेकिन ऐसे दिवस जिसका हमारे देश हमारी संस्क्रती से कोई लेना देना नहीं है उसपर करोड़ों करोड़ रूपये और अपना बेशकीमती वक्त बर्बाद कर डालते हैं तो दोस्तों  नाराज़ ना होना अपना तो रोज़ ही फ्रेंडशिप दिवस है एक दिन तो दिवस वोह लोग मनाते हैं जो साल भर बेवफाई कर केवल एक दिन का दिखावा करते हैं हम और आप तो आजीवन  अटूट दोस्ती के रिश्ते में बंधे हैं इसलियें यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे दोस्तों ..............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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2 टिप्पणियाँ:

vidhya ने कहा…

dosti pe jaan

तरुण भारतीय ने कहा…

सही कहा इस देश कि संस्कृति में हर दिन मित्रता का है ...बहुत अच्छा ...

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