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मै बीमार नहीं-ईमानदार हूँ

Written By surendra kumar shukla BHRAMAR on शनिवार, 3 सितंबर 2011 | 5:22 pm

मै बीमार नहीं-ईमानदार हूँ
कुरुक्षेत्र के मैदान सा
खौफनाक -धंसा चेहरा
टूटी खटिया और मडई में पड़ा
घेरे -अधनंगे
चमकता चेहरा चरित्रवान बच्चे
साधारण जीर्ण वस्त्र में लिपटी
ये मेरी प्यारी गुडिया
अर्थी उठाने नहीं जुटे
मै बीमार नहीं ईमानदार हूँ
ये पढ़ते हैं पास बैठ
मेरे मन को
मेरे दुःख को
मेरे दर्द को
जो मैंने झेला है
घुट-घुट के जिया हूँ
गरल पिया हूँ
मेरे हाथों से छीन
सुधा के प्याले
जब -जब "उन्होंने "-पिया है
चोर-चोर मौसेरे भाई
सच ही कहा है
मेले में अकेले
कोने में पड़ा -पड़ा
तिल-तिल जिया हूँ
साठ साल

गांधी की आत्मा ले
थाना-कचहरी
स्कूल-अस्पताल
पग-पग पे दलाल-
से - कितना भिड़ा हूँ
मै बीमार नहीं
ईमानदार हूँ ----
ये देख रहे हैं
मेरी जमा पूँजी
मेरी धरोहर
मेरी नजरें
पत्थर से दिल पे
खिले कुछ फूल
मेरी मुस्कान
जो अब भी
सैकड़ों में -
फूंक देती है जान
टटोल रहे हैं
मेरा सोने का दिल
और टटोलें भी क्या ??
वहां टंगा है
एक मैला -कुचैला
खादी का कुर्ता
सौ छेद हुयी जेब ------
मै बीमार नहीं
ईमानदार हूँ ----
----------------------
सुरेन्द्र कुमार शुक्ल "भ्रमर"५
02.09.2011 HP
00.५४ पूर्वाह्न
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2 टिप्पणियाँ:

Rahul Paliwal ने कहा…

ईमानदारी को आज के दौर में महामारी समझ लिया गया हैं. एक अलग तरह का मशीनी सिस्टम खड़ा हुआ हैं. और यही लड़ाई हैं. बहूत खूब.

शालिनी कौशिक ने कहा…

एक मैला -कुचैला
खादी का कुर्ता
सौ छेद हुयी जेब ------
मै बीमार नहीं
ईमानदार हूँ ----
सच है आज ईमानदार की यही स्थिति है.


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रहे सब्ज़ाजार,महरे आलमताब भारत वर्ष हमारा

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