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डा. दिव्या श्रीवास्तव जी अपने ब्लॉग ‘ज़ील‘ पर शायद अब और न लिखेंगी,

Written By DR. ANWER JAMAL on सोमवार, 19 सितंबर 2011 | 6:48 pm

डा. दिव्या श्रीवास्तव जी अपने ब्लॉग ‘ज़ील‘ पर शायद अब और न लिखेंगी,
कारण उन्होंने यह बताया है कि किन्हीं अनुराग शर्मा जी ने एक पोस्ट लिखकर उनका अपमान कर दिया है और मर्धन्य से ब्लॉगर्स ने उनकी हां में हां मिलाई है।
यहां तक कि पाबला जी ने भी लिख डाला
‘छील कर रख दिया‘
बस यही बातें उन्हें खा गईं और वे हौसला हार बैठीं।
औरत ख़ुद को कितना ही ‘आयरन लेडी‘ लिख ले , लेकिन वास्तव में उसका दिल होता है मोम जैसा ही, जो एक आंच से ही पिघल जाता है और औरत का ही क्या ख़ुद मर्द का दिल भी ऐसा ही होता है चाहे वह कितना कह ले कि मर्द को दर्द नहीं होता।
दर्द भी होता है और टीस भी उठती है।
जो आदमी अपने रब की रज़ा की ख़ातिर उसका पैग़ाम आम करता है, सिर्फ़ वही इस दुख दर्द को ख़ातिर में नहीं लाता, वर्ना तो हरेक आदमी इसके सामने आखि़रकार घुटने टेक ही देता है।
समाज सुधारक बनना कोई हंसी खेल नहीं है।
जो इस राह पर चले वह चलने से पहले ही सोच ले कि
‘इक आग का दरिया है और डूब कर जाना है‘
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5 टिप्पणियाँ:

Dilbag Virk ने कहा…

ब्लॉग जगत के लिए यह एक बुरी खबर है

पत्रकार-अख्तर खान "अकेला" ने कहा…

nhin bhaai aesaa nhin honaa chaahiye ghr privar me gltiyaan to hoti hi hai sulh sfaayi bhi hoti rhti hai yun ruthh kr nhin betha jata hai .akhtar khan akela kota rajsthan

vishwajeetsingh ने कहा…

औरत चाहे अपने को कितना भी ' आयरन लेडी ' लिख ले , फिर भी उसका दिल होता है मोम जैसा ।
डॉ. श्रीअनवर जमाल जी नारी का दिल मोम जैसा होता है तभी वह अपने प्रति किये गये अपमान को भी सहन कर जाती है , यदि वह सच में अपने ' आयरन लेडी ' वाले रूप में आ जाये तो कटाक्ष व व्यंगात्मक लेखों द्वारा उसका अपमान करने वाले दुष्टों का वह काल बन जाती है ।
आदरणीया दिव्या दीदी सच में आयरन लेडी है । उन्होंने सन्यास की घोषणा की है , पलायन की नहीं । सन्यास का अर्थ तो समझ लो , सन = स्थित होना और न्यास का अर्थ होता है = अपने केन्द्र में अर्थात अपने केन्द्र में स्थित होने को सन्यास कहते है । हमें विश्वास है कि हमारी दिव्या दीदी सन्यास में स्थित होकर अर्थात अपने शक्तियों को एकाग्र कर अपने दिव्य लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमारे बीच में अवश्य आयेगी ।

vishwajeetsingh ने कहा…

औरत चाहे अपने को कितना भी ' आयरन लेडी ' लिख ले , फिर भी उसका दिल होता है मोम जैसा ।
डॉ. श्रीअनवर जमाल जी नारी का दिल मोम जैसा होता है तभी वह अपने प्रति किये गये अपमान को भी सहन कर जाती है , यदि वह सच में अपने ' आयरन लेडी ' वाले रूप में आ जाये तो कटाक्ष व व्यंगात्मक लेखों द्वारा उसका अपमान करने वाले दुष्टों का वह काल बन जाती है ।
आदरणीया दिव्या दीदी सच में आयरन लेडी है । उन्होंने सन्यास की घोषणा की है , पलायन की नहीं । सन्यास का अर्थ तो समझ लो , सन = स्थित होना और न्यास का अर्थ होता है = अपने केन्द्र में अर्थात अपने केन्द्र में स्थित होने को सन्यास कहते है । हमें विश्वास है कि हमारी दिव्या दीदी सन्यास में स्थित होकर अर्थात अपने शक्तियों को एकाग्र कर अपने दिव्य लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमारे बीच में अवश्य आयेगी ।

किलर झपाटा ने कहा…

बिल्कुल सही कहा भाईजान आपने। १०० फ़ीस्दी पुख्ता।

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