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राख में दबे शोलों को जरा गौर से उठाना

Written By Brahmachari Prahladanand on गुरुवार, 29 सितंबर 2011 | 8:54 am

राख में दबे शोलों को जरा गौर से उठाना,
हाथ जल सकता है,
बाबा लोगों का भस्म से लिपटा रहना,
अच्छा लगता है,

इस शोलों से आग अपनी जला लो,
न बुझाओ इन्हें, इनसे ताप ले लो,
गर हवा थोड़ी भी लगी शोलों को,
तो भड़क उठेंगे, रोशन जहाँ करेंगे,

रूह की गर्मी से,
गर्म उनकी देह,
हो रखी है,

तुम न जल जाओ,
तभी तो भस्म,
लपेट रखी है,

याद करो बिजली के,
नन्गे तारों को,
छूते नहीं,
उन पर भी,
परत होती है,

                       ------- बेतखल्लुस


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1 टिप्पणियाँ:

तरुण भारतीय ने कहा…

बहुत खूब ............धन्यवाद

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