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दिए जले, दिए जले

Written By Brahmachari Prahladanand on बुधवार, 26 अक्तूबर 2011 | 11:08 pm


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दिए जले, दिए जले,
देखो कितने दिए जले,
आस पास उजाला जले,
जगमग दिए अब जले,

अमावस की रात में,
काली अँधेरी रात में,
उजाला है साथ में,
फुलझड़ी है हाथ में,

पटाखे हैं फूट रहे,
लोग मज़े हैं लूट रहे,
मिठाईयां हैं बाँट रहे,
बधाईयाँ हैं बाँट रहे,

चेहरे पर हैं हँसियाँ,
मना रहे हैं खुशियाँ,
जल रही हैं लड़ियाँ,
चल रही हैं, चर्खियाँ,

दीवाली हैं मनाते सब,
खुशाली में दिया जलाते सब,
गम को भूल जाते अब,
थोडा-थोडा आनंद उठाते सब,

                                   ------- बेतखल्लुस


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2 टिप्पणियाँ:

sushma 'आहुति' ने कहा…

दिए जले, दिए जले,
देखो कितने दिए जले,
आस पास उजाला जले,
जगमग दिए अब जले,... बहुत ही सुन्दर..... रचना....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर!
दीपावली, गोवर्धनपूजा और भातृदूज की शुभकामनाएँ!

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