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Written By Anurag Anant on सोमवार, 17 अक्तूबर 2011 | 11:22 pm

कई बार ऐसा लगा है ,
स्वतंत्रता कैद हो गयी है ,
तारीख के किसी पुराने ,
जर्जर किले में,
जिसका नाम है ,
15 अगस्त 1947 ,
उस किले के पीछे ,
और आगे बह रही है
मासूमों की खून की नदियाँ ,
जिनका कुसूर बस इतना था
कि उन्हें आजादी प्यारी थी
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1 टिप्पणियाँ:

ana ने कहा…

bahut badhiya soch liye hue kavita

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