नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

चन्द्रमुखी चौटाला का फ़साना - 2

Written By Pappu Parihar on रविवार, 2 अक्तूबर 2011 | 10:30 am

चन्द्रमुखी चौटाला
कविता कौशिक
Kavita Kaushik




इतनी संजीदगी,
इतनी आतिफ-ए-आलब्दारी,
तुझे देखते ही,
चली जाती है,
सबकी हुसयारी,

घनी बात कहनी है थारे से,
सपनों में मिलनी है थारे से,
पर डर लागे है थारे से,
सोचा न जाए मारे से,
के बोलूँ इब थारे से,

यूँ तन्ने रोज़ टी. वी. पे,
देखता रहूँ,
तेरे जैसा सब पे,
मेरा भी रुआब हो,
सोचता रहूँ,

तेरी छोट्टी-छोट्टी बातें,
कितना घना ज्ञान दे जावें,
तभी तो सारी जणता,
अपने कुणबे के साथ,
तुझे देखने टी. वी. पे आवें,


.

.



Share this article :

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your valuable comment.