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Written By Akhtar khan Akela on शुक्रवार, 11 मार्च 2011 | 7:39 am

अदालत के आदेश के बाद भी मुकदमा दर्ज नही करने पर आई पी एस विशाल बंसल के खिलाफ कार्यवाही के आदेश

 कोटा की अदालत पांच उत्तर ने  अदालत के आदेश के बाद भी मुकदमा दर्ज नही करने पर आई पी एस विशाल बंसल के खिलाफ कार्यवाही के आदेश देते हुए इस मामले में कार्यवाही करने के लियें राजस्थान के पुलिस महानिदेशक और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोटा को तहरीर जारी की हे .  
कोटा में वर्ष २००८ नोव्म्बर में भीमगंज मंडी  पुलिस ने एक वारंटी खालिक उर्फ़ पपू को गिरफ्तार किया था और उसे जेल भेजते ही तबियत बिगड़ने के बाद उसकी म्रत्यु हो गयी थी बस खालिक के परिजनों ने मारपीट कर हत्या कर देने का मामला थाने में दर्ज कराना चाहा लेकिन दर्ज नहीं किया गया यह लोग मेरे पास आये मेने मरने वाले के भिया शोकत की तरफ से न्यायालय पांच उत्तर कोटा में भीम गंज मंडी थाना धिकारी और दुसरे सम्बन्धित लोगों के खिलाफ परिवाद पेश किया अदालत ने मामले की गंभीरता देखते हुए प्रथम द्रष्टया माना और २३ नवम्बर २००८ को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए लेकिन पुईस ने अदालत के आदेश के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया और इस्तिगासा वापस अदालत भेज दिया कहा गया के इस मामले में मर्ग दर्ज कर लिया गया हे बस फिर क्या था मेने एक दरख्वास्त अदालत में पुलिस कर्मियों के खिलाफ न्यायालय के आदेश की अवमानना मामले में लगाई अदालत ने मामले की गम्भीरता को माना और ६ जनवरी २००९ को एक आदेश जारी कर कोटा में तेनात पुलिस अधीक्षक को एक आदेश जारी कर परिवाद साथ भेजा और मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही के निर्देश दिए लेकिन पुलिस अधीक्षक विशाल बंसल ने मुकदमा तो दर्ज नहीं किया ओर न्यायाल्स से भेजा परिवाद बिना न्यायालय की अनुमति के आदेशों को अवेध बताते हें पुलिस अधीक्षक कोटा की तरफ से एक निगरानी याचिका जिला न्यायाधीश के समक्ष पेश कर दी गयी हमें पुलिस की शरारत का जब पता चला तो हमने एक दरख्वास्त अदालत में फिर से दोषी पुलिस अधिकारी को दंडित करने की लगाई .
अदालत ने हमारी बहस और कानूनी दलीलें सुनने के बाद पुलिस अधीक्षक की निगरानी खारिज कर निचली अदालत के आदेश को यथावत रखा बस हमें एक दरख्वास्त फिर कार्यवाही करने के लियें लगाई इस बीच में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामला ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार में न्यायालय के आदेश के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ उसे निलम्बित कर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लियें प्राधिक्र्ट अधिकारी को लिखने के निर्देश दिए साथ ही यह एक अपराध मानते हुए ऐसे अधिकारी को सजा दिलवाने और जेल भेजने के लियें मुख्य्न्यायिक मजिस्ट्रेट को लिखने के निर्देश हें हमने व्ही कानून अदालत में पेश किया अदालत ने खुद जांच की सभी पक्षों को पुलिस अधीक्षकों को नोटिस देकर जवाब तलब किया तात्कालिक पुलिस अधीक्षक जनाब विशाल बंसल आई पी  एस ने जवाब में ६ जनवरी के आदेश की पालना में ७ जनवरी को ही परिवाद पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश देने बाबत कथन किया लेकिन थानाधिकारी चन्दन सिंह ने इसे अस्विकारी किया और फिर जब खुद पुलिस अधीक्षक की तरफ से न्यायालय के आदेश के खिलाफ निगरानी याचिका पेश की गयी थी तो फिर ७ जनवरी को आदेश देने वाली बात झूंठी हो जाती हे बस रिकोर्ड के आधार पर न्यायालय ने तात्कालिक कोटा पुलिस अधीक्षक विशाल बंसल को दोषी माना और उनके खिलाफ महानिदेशक राजस्थान सरकार को निलम्बित क्र अनुशासनात्मक कार्यवाही के लियें कथन किया गया साथ ही दंडात्मक कार्यवाही करवाने के लियें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को पत्र भी लिखा हे . 
दोस्तों मेरी यह कार्यवाही कहने को तो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही हे लेकिन मेरी इस कार्यवाही से हजारों उन पुलिस कर्मियों को सबक मिलेगा जो फरियादियों को थानों पर चक्कर लगवाती हें और अदालत से भी अगर आदेश आ जाएँ तो भी परिवाद महीनों थानों पर पढ़े रहते हें और मुकदमे दर्ज नहीं होते ऐसे लोगों को अबइस आदेश से सबक मिलेगा . अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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