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Written By Akhtar khan Akela on मंगलवार, 29 मार्च 2011 | 8:24 am

ऐ धरती माँ ..................

ऐ धरती माँ 
में भी तेरा लाल हूँ 
माँ की कोख से 
तो जन्मा हूँ 
बस 
बचपन से 
तेरे आँचल से लिपट कर 
तुझ में मिलकर खेला हूँ 
तेरी हिफाजत के लियें 
बंदूक मेने उठाई हे 
कई बार मेने 
तेरी हिफाजत करते 
चोट भी खाई हे 
मेरे बुजुर्गों ने 
तेरी आन बान शान के लियें 
अपनी जान गंवाई हे 
ऐ धरती माँ 
तू ही बता 
क्या यह सच हे 
कुछ लोग हें 
जो खुद को 
तेरा अपना खास बेटा कहते हें 
यह वोह लोग हें 
जो तेरी सुख शांति एकता अखंडता का 
सोदा करते हें 
यह कहते हें 
के तेरी वोह दोगले इंसान ही 
असली सन्तान हे 
और हमें कहते हें 
के तुम माँ के बेटे नहीं 
तुम तो सोतेली सन्तान हो 
ऐ धरती माँ 
तू ही बता 
एक धरती एक देश एक योजना एक कानून 
फिर हमारे साथ दोहरा सुलूक 
तो क्या 
हम मानलें 
के हम 
तेरी सोतेली सन्तान हें 
देख माँ 
में तुझे बता दूँ 
जब हम बीमार होते हें 
जब हमारे पास पानी नहीं होता हे 
तब हम 
तेरी इस मिटटी को 
अपने चेहरे और हाथ पर 
तेहम्मुम यानी वुजू कर लेते हें 
इसी मिटटी को रगड़ कर 
खुद को पाक कर लेते हें 
और तेरी ही आँचल पर 
बेठ कर 
अपनी नमाज़ पढ़ लेते हें 
ऐ धरती माँ 
मरते हें जब हम 
तब भी तेरी ही गोद में 
हम खुद को छुपा कर सुला देते हें 
तुझ से इतना प्यार 
तुझ पर इतना अटूट विशवास 
तो फिर यह 
दुसरे लोग जो 
तुझे लुटते हें तेरी धरती पर माँ बहनों की अस्मत लुटते हें 
निर्दोषों का कत्ल करते हें 
विश्वास घात ,भ्रष्टाचार करते हें 
ना तुझ में मिलते हें ना तेरी गोद में सोते हें 
फिर तू ही बता 
यह लोग 
केसे और केसे 
तेरी सन्तान हो सकते हे ..तेरी सन्तान हो सकते हें ............... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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2 टिप्पणियाँ:

हरीश सिंह ने कहा…

bahut sundar rachna akhtar bhai.. vedna jhalak rahi hai
bhabhi ji ke sath jam rahe hai.. ab samajh me aaya aap dono milkar yek hain. isiliye akela likhte hai.. ha ha ha
khuda kare aap dono ka pyar yu hi bana rahe. aapka jivan sukhmay rahe.

Surendrashukla" Bhramar" ने कहा…

अख्तर खान अकेला भाई नमस्कार बहुत ही शानदार रचना माँ के नाम एक बेटे की माँ के लिए तो सब समान होते हैं लेकिन कुछ स्वार्थी उसे अपने धन बल पर भरोसा कर बहकाते हैं भाई भाई को लड़ाते हैं और खुद बन्दर बाँट में लगे अपना उल्लू सीधा करते हैं
धन्यवाद

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