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Written By Akhtar khan Akela on गुरुवार, 24 मार्च 2011 | 9:04 am

महापोर विदेशों की नसीहत से भी नहीं सुधरीं

महापोर विदेशों की नसीहत से भी नहीं सुधरीं  वोह पहले फ्रांस और अब अबुधाबी की यात्रा से वापस आई हे उन्होंने ओमान में सडकों पर कांच जेसी सफाई जानवरों से मुक्त सडक को देख कर खुद को कोटा की इस बदरंग व्यवस्था का ज़िम्मेदार नहीं माना हे उन्होंने बात जनता पर डाल दी हें उनका कहना हे के कोटा की जनता अगर कोटा को अपना शहर माने तो यहाँ ऐसी व्यवस्था हो सकती हे इधर कोटा के विधायक ओम बिरला य्हना की व्यवस्था पर जम कर बरसे हें .
जी हाँ दोस्तों कोटा की महापोर जिन्होंने कोटा में इंटरनेट पर जनता से जुड़ने के लियें माई कोटा के नाम से एक ब्लॉग जारी किया था जिससे जनता को जोड़ने की बात कही गयी थी लेकिन जब उपलब्धियों के नाम पर जीरो रिजल्ट रहा तो जनता की शिकायतों का सामना नहीं कर पाने के कारण महापोर डॉक्टर रत्ना जेन ने खुद ही अपने इस माई कोटा से मुंह मोड़ लिया और बीच में ही इस माई कोटा को लटका कर रख  दिया वोह इस शहर को सुधरने के नाम पर सूरत,फ्रांस और न जाने कहाँ कहाँ गयीं लेकिन नतीजे के नाम पर सिफर रहा हे महापोर रत्ना जेन ने विदेश यात्रा से वापस कोटा लोटते ही शहर की साफ़ सफाई के बारे में जानकारी नहीं ली उन्होंने तो सबसे पहले अपने एशो आराम के लियें आदमकद महंगी गाडी नगर निगम के खर्चे से कल खरीदी हे जबके निगम के पास पहले से ही कई गाड़ियाँ मोजूद हें और नई गाडी खरीदने का जनता और विपक्ष विरोध करते रहे हें निगम अभी कर्जदार हे फिर भी इस तरह की फ़िज़ूल खर्ची जनता पर बोझ ही कही जा सकती हे . खुद महापोर ने ओमान की सडकें देख कर हेरानी जताई हे के वहां की सफाई और जानवरों मुक्त छोड़ी सडकें आदर्श व्यवस्था हे फिर महापोर यह व्यवस्था कोटा में क्यूँ लागू नहीं कर पा रही हें शर्मनाक बात हे .
इधर कोटा की जगह जगह खुदी सडकों और आवारा मवेशी की दुर्घटनाओं से तंग जनता का दर्द जब महापोर और कोटा नगर निगम ने नहीं समझा तो कोटा के विधायक ओम बिरला ने इस मामले को दमदारी से राजस्थान विधानसभा में उठाया हे लेकिन कोटा के पास और सरकार के पास कोटा में इस व्यवस्था को सूधारने के लियें कोई भी योजना नहीं हे इसलियें महापोर का माई कोटा तो लुट रहा हे लोगों और माई कोटा का नारा देने वाली महापोर सरकार तमाशबीन बनी हे यारों ....... . अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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