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Written By Akhtar khan Akela on मंगलवार, 22 मार्च 2011 | 5:39 pm

एक इमाम,एक निजाम तभी ख़ुशी का हे पैगाम ..................

दोस्तों कुरान ,गीता बाइबिल सभी धर्मग्रंथों में लिखा हे के अगर आपका एक इमाम ,एक निजाम ,एक प्रबंधन होगा  और उसके बनाये गये कानून पर सभी चलेंगे तो बस समाज में खुशियाँ ही खुशियाँ होंगी और जो भी इस निजाम के खिलाफ अपने कई इमाम कई निजाम बनाएगा वोह बर्बादी की तरफ डूबता जाएगा और आज यही सब कुछ हो रहा हे . 
आगामी २६ मार्च को बोहरा समाज के सय्याद्ना साहब का सोवां जन्म दिन हे इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बोहरा समाज की खुशहाली , अपनापन , सद्चरित्रता और व्यापारिक कामयाबी देख कर इस समाज की एकता अखंडता और खुशहाली पर रिसर्च करने को मन करा सोचा कुछ मुट्ठीभर लोग जहां हे वहां खुशहाल सुखी और समर्द्ध हे पढाई  में अव्वल हे तो व्यापर में अव्वल मेहनत में अव्वल और अपने खुदा के प्रति समर्पित हें इस समाज में अपराध और बेकारी दो चीजें ला पता हे सभी लोग बेकारी और अपराध से दूर हे समाजवाद का सिद्धांत ऐसा के एक दुसरा एक दुसरे को समाज में स्थापित करने के लियें मदद गार हे  ,  इसकी तह में जाने पर बस एक ही सच सामने आया और वोह था एक इमाम एक निजाम एक प्रबन्धन मेने देखा समझा के बोहरा समाज ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर केवल एक धर्मगुरु सय्य्दना साहब को मान्यता दी हे और विश्व स्तर पर जो स्यय्द्ना साहब ने कह दिया सभी समाज के लोगों के लियें वोह कानून हे अतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश स्तर से लेकर जिला और ताल्लुक्का स्तर तक केवल स्य्य्दना साहब का हुक्म उनका कानून जो उन्होंने कुरान में  से निकाला हे  वही चलता  हे और हर समाज का व्यक्ति इस कानून इस आदेश को मानने के लियें बाध्य हे दुसरे इमाम के प्रति समाज का समर्पण ही उनके बनाये गये हर कानून हर आदेश को स्वत्त ही मान्यता दे देता हे और आज फितरा  जकात के अलावा वार्षिक मदद से यह निजाम विश्व स्तर पर नम्बर वन पर चल रहा हे बोहरा समाज के लोगों को सीख़ दी गयी हें  के वोह नोजवानी से लेकर बुढ़ापे तक फ़ालतू बेठ कर  में वक्त न गवाएं केवल इबादत सेवा और व्यापार अपनी दुनिया बस यहीं तक सिमित रखने की सीख़ इन्हें दी जाती हे और इसीलियें  सभी समाजों में एकता अखंडता और एक इमाम के आदेश निर्देशों की पालना में यह एक पहला विकसित और एक खुशहाल समाज हे . इसी तर्ज़ पर मामूली सा चलने वाला सिक्ख समाज हे जो थोड़ा बहुत मुकाबले में खुशहाल हे .
दूसरी तरफ हम मुस्लिम समाज को देखें हिन्दू समाज को देखें इन दोनों समाज में एक तो इमाम ही इमाम हे मुसलमानों में ७३ फ़िर्के और इन फिरकों के हजारों इमाम फ़ालतू बेठ कर एक दुसरे की बुराइयां करने  में वक्त बर्बाद करना जाति उपजाति का इस्लाम के खिलाफ भेदभाव अमीरी गरीबी का भेदभाव शराब जुआं  ब्याज चंदा खोरी  और इमामों में राजनितिक पद पाने की पद लोलुपता ने इस समाज को विखंडित कर के रख दिया हे आज कानून एक हे इमाम एक होना चाहिए ऐसा संदेश हे उसके प्रति समर्पण का आदेश हे लेकिन इस कानून के विखंडित हो जाने से देश भर में और विश्व भर में मुस्लिम समाज किस दोर से गुजर रहा हे सब देखने की बात हे , इसी तरह से इस देश में हिन्दू भाइयों को ही लो वहां भी वही जाती उपजाति का भेदभाव विभिन्न पन्थ विभिन्न धर्मगुरु चंदे की दुकाने और धर्म और धर्म गुरु के निर्देशों के प्रति समर्पण का अभाव धर्मगुरुओं में राजनितिक पद लोलुपता बस इसीलियें इतने बढ़े समाज का हाल हम देख रहे हे तो दोस्तों कोई आये ऐसा बदलाव जिसमें इन दो बढ़े समाजों में भी धर्म और आस्था के कानून के तहत एक इमाम एक निजाम एक प्रबन्धन का सिद्धांत लागू हो और यह समाज खुशहाल होकर विकास एकता अखंडता की राह पर चलें ताके हमारा यह देश भी एक बार फिर सोने की चिड़िया बन सके ..................................... . अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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