नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

Written By Akhtar khan Akela on बुधवार, 30 मार्च 2011 | 8:40 am

सरकार की सुप्रीम कोर्ट से भी चालबाजी

देश के भ्रष्ट सुप्रीमों जो सरकार के मंत्रियों रिमोट कंट्रोलरों के हमजोली बने हें उन्हें बचाने के लियें सर्कार देश की जनता के साथ तो उन्हें खून के आंसू रुला कर नंगा खेल खेलती ही रही हे लेकिन अब सरकार की हदें देखो के उसने बेईमान लोगों को बचाने के लियें सुप्रीमकोर्ट से भी आँख मिचोली का खेल खेलना शुरू कर दिया हे और सरकार की इन चालबाजियों से अब सुप्रीम कोर्ट भी देश की जनता की तरह तंग आ गयी हे इसीलियें अब सुप्रीमकोर्ट सभी मर्यादाएं ताक में रख कर एक आम आदमी की तरह सरकार पर खीजने लगी हे .
जी हाँ दोस्तों यह एक कडवा सच हे यही सुप्रीमकोर्ट जब ही आम आदमी सुप्रीमकोर्ट के पास भ्रस्ताचार की शिकायतें लेकर जाता था तब यही सुप्रीमकोर्ट जुर्माने से उनकी याचिकाओं  को ख़ारिज कर दी गयी हे लेकिन कहते हें के दर्द का हदसे बढना दवा हो जाता हे और हमारे देश में भी यही हुआ यहाँ यहाँ भ्र्स्थाचार जब चरम सीमा पर पहुंच गया विभिन्न पहलुओं से सरकार ने भ्रस्ताचार और सरकार के खेल को देख लिया तो सुप्रीमकोर्ट को काले धन की सूचि को सार्वजनिक करने के आदेश देना पढ़े लेकिन यह तो सरकार हे उसने सुप्रीमकोर्ट के इन आदेशों को ठुकरा दिए बार बार आदेश देने पर भी इस आदेश की पलना नहीं की गयी . 
देश के खरबों रूपये का गबन करता आरोपी हसन अली को रस्मन पकड़ा गया और  प्रवर्तन निदेशालय ने हाथ ऊँचे कर दिए कोई सुबूत पेश नहीं किये गए मजबूरी में डंके की चोट पर हसन अली को जमानत मिली लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस गोरख धंधे को समझ गया था इसीलियें हसन अली की जमानत ख़ारिज कर उसे हिरासत में भेजा गया कार्यवाही पर खुद ने निगरानी रखी एक दिन दो दिन बस तिन दिन में ही सुप्रीम कोर्ट की समझ में आ गया के यह न्याय नहीं राजनितिक खेल हे हसन अली और उसके साथियों को बचाने की कोशिशें की जा रही हें और जनता के साथ सुप्रीम कोर्ट को भी गुमराह किया जा रहा हे इसलियें सुप्रीम कोर्ट को चीख कर कहना पढ़ा यह क्या तमाशा हे यह क्या हो रहा हे एक आदमी से आज तक साथियों की जानकारी नहीं ली गयी हसन अली के अलावा आज तक और दुसरे लोग परदे में क्यूँ रखे जा रहे हें सुप्रीम कोर्ट ने निदेशालय की इस कार्यवाही पर अविश्वास जताते हुए एस आई टी विशेष दल के गठन के आदेश दिए हें कलि सूचि वाले कोन हें उन्हें सार्वजनिक रूप से जनता के सामने लाने के निर्दश दिए हें लेकिन मेने गिना हे सुप्रीम कोर्ट ने इस नकटी सरकार को १७ बार कठोरता से इस तरह के आदेश दिए हें लेकिन एक आदेश की भी सरकार ने पालना नहीं की हे अब जब सुप्रीम कोर्ट को सरकार ने अंगूठा दिखा रखा हे तो फिर आम जनता का तो क्या हाल होगा अंदाजा लगाया जा सकता हे खुदा खेर करे ..................... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
Share this article :

1 टिप्पणियाँ:

Surinder Social Worker ने कहा…

ऐसे ही लिखते रहें देश की जनता को जाग्रित करते रहें अापका लेख अाज ही पढा पसंद आया


धन्‍यवाद

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your valuable comment.