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कुछ अनकही अनजानी सी ...

Written By PRIYANKA RATHORE on शुक्रवार, 25 मार्च 2011 | 5:27 pm





कुछ अनकही
अनजानी सी 
एक नयी राह पर .......

उन पर इल्जाम लगा बैठी !
फूलों के फेरे में
काँटों में ही
खुद को उलझा बैठी !!

कुछ अनकही
अनजानी सी...........

गलती के
इस नये भंवर में
दिल में शूल चुभा बैठी !
दर्द के इस समन्दर में
खुद को ही डूबा बैठी !!

कुछ अनकही
अनजानी सी
एक नयी राह पर ........!!



प्रियंका राठौर
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3 टिप्पणियाँ:

Dilbag Virk ने कहा…

फूलों के फेरे में
काँटों में ही
खुद को उलझा बैठी !
---- aksar hota hai esa
sunder kvita

,backdoor entry-laghu katha

akhtar khan akela ने कहा…

bhtrin rchnaa mubark ho .akhtar khan akela kota rajsthan

इन्द्र सभा ने कहा…

मातम न मना ओ प्यार मेरे, देख अभी मैं जिन्दा हूँ |
रुखसत न हुआ अभी जनाजा मेरा, इंतज़ार है तेरी वफ़ा का मुझे |

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