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Written By Akhtar khan Akela on शुक्रवार, 4 मार्च 2011 | 5:52 pm

कोंग्रेस के क्या फिर दो फाड़ होंगे

देश में चल रही वर्तमान परिस्थितियों के चलते राजनितिक अनुमान के तहत कोंग्रेस के फिर दो फाड़ होना सम्भावित हें पहले नर्सिंघ्म्मा राव के कार्यकाल में जब कोंग्रेस पर भ्रस्ताचार के गम्भीर आरोप लगे थे तब कोंग्रेस के कई लोग अलग हो गये थे नर्सिंग्घाराव प्रधानमन्त्री के वित्तमंत्री रहे मनमोहन सिंह के प्रधानमन्त्री कार्यकाल में कोंग्रेस के गिरावट का इतिहास दोहराया जा रहा हे ।
आज एक कोंग्रेसी का कहना था के देश के साथ गद्दारी और जनता का शोषण कर राष्ट्र को गिरवी रखने वाला कोई भी आदमी कभी सुकून से नहीं रह सकता उसने पूर्व प्रधानमन्त्री नर्सिंग्गाराव के घोटालों को गिनाया फिर उनके आखरी वक्त की याद दिलाई उनकी चिता के हालात के बारे में बताया खेर जो नहीं हे उस पत टिप्पणी ठीक नहीं हे इश्वर की मर्जी थी इसलियें ऐसा हुआ था लेकिन वर्तमान में मनोहं जी के कार्यकाल में जो कुछ भी हो रहा हे वोह चोंका अदने वाला हे पहले तो घोटालों में क्रिश्चियन और सिक्ख ख़ास तोर पर पकड़ में आ रहे हें सरकार जिन्हें बचा रही हे वोह भी इसी कम्युनिटी के हें कोंग्रेस और कोंग्रेस के राज में इस तरह की गिरावट आएगी इसकी कल्पना कभी भी किसी भी कोंग्रेसी ने नहीं की थी इसलियें कई कोंग्रेसी आज इन हालातों से आहट हें और कोंग्रेस के कार्यकर्ता गलियों चोराहों पर गुपचुप चर्चा कर इन हालातों पर अफ़सोस ज़ाहिर कर रहे हें ।
आज देश में कोंग्रेस में ही दो विचारधाराएँ हो गयी हें एक राष्ट्रवादी लोग जिनके लिए देश सन्गठन से पहले हे वोह सोचते हें के अब तो बुत हो गयी बस विराम होना चाहिए और प्रधानमन्त्री हो चाहे कोई भी हो देश के साथ गद्दारी देश के लोगों के साथ बे इमानी करने वालों को खुलेआम सजा मिलना चाहिए एक गुट वोह हे जो चाहता हे जो हो रहा हे होने दो जो लोग कर रहे हें उन्हें करने दो उनका कहना हे के अपने लोग हें इसलियें खामोश तमाशा देखो और उन्हें बचाने के बारे में सोचो देश और जनता भाड़ में जाती हे तो जाने दो बस इसीलियें अब देश के हालात विकट हो गये हें भाजपा के लोग काले धन की सूचि और पुराने घोटालों के दबाव में सार्वजनिक रूप से प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह को इमानदारी का प्रमाणपत्र देते हें सुप्रीम कोर्ट खुले आम बेईमान साबित करती हे और जनता बेचारी पिसती रहती हे लेकिन अब खुद कोंग्रेस में अंतर द्वन्द्ध हे कोंग्रेस के लोग राष्ट्रीयता और पार्टी के बीच भंवर में फंस गये हे वेसे कोंग्रेस में राष्ट्रीयता का भाव रख कर वर्तमान परिस्थितियों में कोंग्रेस के क्रिया कलापों की आलोचना करने वालों की संख्या कम हे लेकिन उनका जज्बा उनकी शिकायतें और कोंग्रेस को राष्ट्र हित में शुद्धिकरण करने का उनका सपना मजबूत हे और वोह जल्द ही देश और जनता के हित में कोंग्रेस में सफाई अभियान के तहत कुछ लोगों को तो बढ़ा बे आबरू करेंगे देखते हें यह खुशनसीब दिन कब आता हे । अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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