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ढहने लगे मुबारक युग के प्रशासनिक ढांचे

Written By RAJKUMAR BHATTACHARYA on सोमवार, 7 मार्च 2011 | 7:13 pm


मीडिया ने शुरू की अनदेखी  
सैन्य प्रशासन सजाने लगा लोकतान्त्रिक मंच

शायद पूरी दुनिया के मीडिया प्रतिष्ठानों को इस बात का गुमान भी नहीं था कि मिस्र में होस्नी मुबारक के तीन दशकों का राज समाप्त होने के ठीक बाद अफ्रीका का स्विट्जरलैंड कहलाने वाला लीबिया जनांदोलन की आग में झुलसने लगेगा। नतीजा यह है कि लीबिया के हर रोज की खबरें जुटाने में व्यस्त मीडिया की नजरें मिस्र में चल रहे तेज बदलाव से लगभग हट-सी गई हैं। मिस्र में नई सरकार चलाने के लिए जो व्यवस्थागत परिवर्तन किए जा रहे हैं, मुबारक युग के ढांचे ढहाए जा रहे हैं, उनके बारे में मीडिया लगभग अनजान बना हुआ है। इसी बीच मिस्र में गृह, विदेश और न्याय विभाग का काम देखने के लिए नए मंत्रियों के नाम घोषित हो चुके हैं। इस घोषणा के समय ध्यान रखा गया कि होस्नी मुबारक के कार्यकाल से जनता की जो शिकायतें थीं उन्हें पूरी तरह से दूर करने की पारदर्शी कोशिश की जाए।
रविवार को हुए मंत्रिमंडलीय फेरबदल में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के पूर्व जज नबील अल राबी को विदेश मंत्री बनाया गया है। वे संयुक्त राष्ट्रसंघ में मिस्र के पूर्व प्रतिनिधि रह चुके हैं। उन्हें इजरायल और मिस्र के बीच हुई कैंप डेविड शांति संधि बारे में कुछ आपत्तियां जताने के लिए मिस्र के कूटनीतिक हलकों में याद किया जाता है। मुबारक के खिलाफ जन असंतोष के प्रदर्शन के दौरान जो बुजुर्गों की स्वतंत्र परिषद बनाई गई थी उसमें भी वे शामिल थे। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री अहमद अबुल गैत का स्थान लिया है। गौरतलब है कि गैत ने वर्ष 2004 में इस पद पर आने के बाद मुबारक की इच्छा केअनुसार मिस्र की विदेश नीतियों को स्वरूप दिया था। उनके स्थान पर राबी को लाया जाना यह दर्शाता है  कि मिस्र में फिलहाल सैन्य परिषद का शासन होने के बावजूद जनता की महत्वाकाक्षाओं से खिलवाड़ करने की कोशिश नहीं की जा रही है। इसके साथ ही सैन्य परिषद ने भी उम्मीद जताई है मिस्र जल्दी ही पहले की तरह खुद पर भरोसा करने लगेगा और वहां की अर्थव्यवस्था फिर से आगे बढऩे लगेगी।
इससे पूर्व पिछले हफ्ते सैन्य बलों केसर्वोच्च परिषद ने देश के युवा वर्ग की आकाक्षाओं का ध्यान रखते हुए अहमद शफीक के स्थान पर एसान शराफ को देश के प्रधानमंत्री का पद सौंपा था। वास्तव में शफीक पूर्व तानाशाह मुबार·क की पसंद थे। 11 फरवरी को अपना पद त्यागने से पहले मुबारक ने उनको प्रधानमंत्री पद के काबिल पाया था। नए प्रधानमंत्री ने रविवार को नए मंत्रिमंडल के सदस्यों से मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। बताया जाता है कि मिस्र की जनता ने सैन्य परिषद के कदमों का स्वागत किया है। वहां के एक राजनीति शास्त्र विशेषज्ञ मुस्तफा कमाल अल सैयद ने पत्रकारों को  बताया कि शराफ को प्रधानमंत्री का पद सौंपे जाने से यह विश्वास जगा है कि मिस्र की आम जनता का मुबारक विरोधी आंदोलन असफल साबित नहीं होने जा रहा है। सैन्य परिषद ने अगले छह महीनों के अंदर देश में संसदीय लोकतंत्र स्थापित करने और नए राष्ट्रपति का चुनाव करवाने के रास्ते पर कदम बढ़ा दिए हैं। बहरहाल, मिस्र के मंत्रिमंडल को अब तक सैन्य परिषद के सर्वोच्च कमांडर फील्ड मार्शल मोहम्मद हुसैन तंतवी की मंजूरी का इंतजार है। उल्लेखनीय है कि तंतवी ने देश के रक्षा मंत्री के पद पर अपना कब्जा भी सुरक्षित रखा है।
नया मंत्रिमंडल गठित करने की इस कवायद के बारे में पूरा मिस्र एकमत हो ऐसी बात भी नहीं है। काहिरा के अमेरि·न विश्वविद्यालय ·े प्रो. अज्जदीन चो·री-फिशर ने ·हा ·ि नए मंत्रिमंडल ·ो अपना इरादा स्पष्ट करने के लिए अधिक से अधिक एक महीने का समय दिया जा सकता है। इसके साथ पूरे देश की शुभकामनाएं हैं और इससे लोगों को बड़ी उम्मीदें भी हैं लेकिन इस मंत्रिमंडल के पास समय नहीं है। यह देश को किस रास्ते पर ले जाना चाहता है यह तत्काल स्पष्ट हो जाना चाहिए। अगर नए मंत्री प्रमुख कार्यों पर जल्द से जल्द कदम नहीं बढ़ाते हैं तो लोगों की उम्मीदें फिर से टूट जाएंगी।
इस मंत्रिमंडल के सामने जो प्रमुख चुनौतियां हैं उनमें से एक है पुलिस बल की तैनाती का मसला। देश में जनांदोलन के दिनों में पुलिस बल के एक बड़े भाग की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। पुलिस की क्रूरता को जन असंतोष भड़काने वाले मुख्य तत्वों में से एक माना गया था। इस मामले में मिस्र के नए गृह मंत्री मंसूर अल-असावी को काफी मेहनत करनी होगी। उन्होंने अपने पद की शपथ लेने के बाद पत्रकारों से कहा भी है कि मिस्र के पुलिस की छवि सुधारना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने जनांदोलन के दौर में पुलिस बल के कुख्यात स्टेट सिक्योरिटी खंड को समाप्त करने या उसका आकार घटाने के बारे में विभिन्न संबंधित पक्षों से बातचीत शुरू कर दी है। असावी का कहना है कि स्टेट सिक्योरिटी बल की भूमिका सिर्फ आतंकी तत्वों को लगाम में रखने तक सीमित कीजाएगी। इस बल को नागरिकों के दैनिक प्रशासनिक जीवन में हस्तक्षेप करने से प्रभावशाली तरीके से रोका जाएगा। उल्लेखनीय है कि असावी पूर्व गृह मंत्री हबीब अल-अदली की कुर्सी पर बैठे हैं जो मुबारक की कृपा से लगातार 13 वर्षों तक इसी विभाग में बने रहे थे। मुबारक ने जनांदोलन के शुरुआती दिनों में अदली को इस मंत्रालय के कार्यभार से विमुक्त कर दिया था। जहां अदली के खिलाफ मनी लांडरिंग में लिप्त होने के आरोप की जांच चल रही है वहीं असावी भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद करते रहे हैं।
मिस्र के नए मंत्रिमंडल में न्याय मंत्री के रूप में मोहम्मद अल-गिंदी को कार्यभार सौंपा गया है। वे आगामी राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव का काम देखेंगे। बताया जाता है कि चुनाव में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वहां की न्यायपालिका चुनाव का संचालन करेगी। जानकारी के मुताबिक, मुबारक को तीन दशक लंबे कार्यकाल की परेशानियों से सीख लेते हुए वहां अब लोकतांत्रिक ढंग से चुने जाने वाले किसी भी राष्ट्रपति को आठ वर्ष से अधिक सत्ता में बने रहने की अनुमति न देने का निर्णय लिया गया है। इस बारे में 19 मार्च को समूचे मिस्र की जनता से रायशुमारी की जाएगी।

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