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Written By Akhtar khan Akela on मंगलवार, 12 अप्रैल 2011 | 5:53 pm

देश का भ्रस्टाचार किसी कानून से खत्म होगा सम्भव नहीं ,इसके लियें हर शख्स को अपने अन्दर अन्ना हजारे पैदा करना होगा

 दोस्तों देश में कई वर्षों से आओ भ्रस्टाचार भ्रष्टाचार खेले का खेल खेला जा रहा है ,यहाँ हर कोई भ्रष्ट है और भ्रस्टाचार के मामले में आरोप प्रत्यारोप का दोर चल रहा है ,लोग कहते हैं के अन्ना ने भ्रस्टाचार के खिलाफ पुरे देश को यानी एक अरब इक्कीस करोड़ भारतीयों को एक जुट कर दिया है , लोग सोचते हैं के आ गया लोकपाल बिल और अब हो गया भ्रष्टाचार दूर, कुछ लोग अन्ना,योग गुरु और भूषण परिवार के बाद नरेंद्र मोदी की तारीफ पर इस आन्दोलन का दूसरा रुख देख रहे है इस मामले में सभी पहलुओं पर गोर करते हुए मेने यह पोस्ट लिखने की कोशिश की है मेरा इस पोस्ट को पढने वालों से निवेदन है के इसमें एक प्रूफ रीडर की तरह इसे ना पढ़े कोमा, फुलिस्टोप ,इमला के पीछे नहीं पढ़े इसे दिल से पढ़े और दिल से पढ़े भावनाओं को समझें ब्लोगिंग को समझे समालोचक की तरह इसे देखे केवल और केवल आलोचक की तरह इसे ना देखें  ताकि देश में भ्रस्टाचार के कारण और निवारण पर आप और हम मिलकर चिन्तन मंथन कर सकें .....................
१९४७ में भारत आज़ाद हुआ देश में संविधान बना जनता का जनता द्वारा शासन हुआ लेकिन तानाशाही का दोर शुरू हो गया गांधी जो राष्ट्रपिता थे उनकी जान हम नहीं बचा सके ,इंदिरा ,राजीव,सहित कई ऐसे नेता हैं जिनको हम खो चुके हैं ,देश में हर कोई सत्ता की तरफ बढ़ चला भ्रस्टाचार,जमाखोरी,कालाबाजारी,सीनाजोरी सभी देश में चरम सीमा पर पहुंचे आप आदमी का जीना मुश्किल हो गया फिर आपात स्थिति की घोषणा की गयी , आपात स्थिति का दुष्परिणाम है तो सकारात्मक परिणाम भी हमे देखना होगा ,यहाँ सभी सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी वक्ती पर जाने लगे थे ,दफ्तरों में आम जनता के काम होने लगे थे, जो भ्रष्टाचारी थे वोह घर बिठा दिए गए थे ,दफ्तरों में राम राज्य था वक्त पर सभी फाइलों को निपटाया जा रहा था . गुंडे बदमाश जेल में थे ,जनता को बहका कर वोट प्राप्त करने की राजनीती करने वाले लोग या तो  जेल में थे या फिर छुपे छुपे फिर रहे थे , अधिकारी चोपाल लगा कर जनता की सुनवाई कर रहे थे ,सफाई,निर्माण,टेक्स वसूली में कहीं भ्रस्टाचार नहीं था , जमाखोरों के सरे गोदाम जनता के लियें खाली कर दिए गए थे ,मिलावट खोरों की आफत आ गयी थी लेकिन इन सभी ने मिलकर एक माहोल बनाया कानून का राज स्थापित करने के माहोल को आज़ादी के खिलाफ प्रचारित किया खुद इंदिरा जी और उनके कुछ अधिकारीयों ने इस वक्त का फायदा उठा कर निजी दुश्मनियाँ निकाली ,नतीजा आपातकाल जो जनता और इमानदार शरीफ लोगों के लियें वरदान साबित हो रही थी उसे विलेन करार देकर सरकार का तख्ता पलट दिया गया बात भी सही थी मुनाफाखोरों ,जमाखोरों,भ्रष्ट,काहिल कामचोर लोगों के खिलाफ देश में यह पहली मुहीम थी लेकिन उसमें इंदिरा जी के निजी स्वार्थों के कारण नतीजे गम्भीर हो गये और जयप्रकाश को जन्म लेना पढ़ा ...................................
जय प्रकाश जी के आन्दोलन के बाद देश में सरकार आई मोरारजी प्रधानमन्त्री बने केवल दुबारा आपातकाल नहीं लग सके इस मामले में संविधान संशोधित किया गया किसी ने भी देश में भ्रस्टाचार केसे रोकें मुनाफा खोरी ,मिलावटखोरी ,कामचोरी ,कर्मचारियों की लेटलतीफी केसे रोकें इस पर कोई विचार नहीं किया गया देश में आपात काल के नतीजों से जो गोदाम भर गये थे उसका फायदा सरकार ने उठाया और फिर देश में महंगाई खत्म लेकिन निरंकुशता और मोका परस्ती की हदें पार हो गयी देश के नेता भर्स्ट हो गये और सरकार बनाने और कुर्सी पाने के लालच में गठ्बन्धन सरकार टांय टाँय फीस हो गयी , राष्ट्र हित में जो साथ बेठे थे  उन्होंने जिसमे शांति भूषण जो वर्तमान लोकपाल बिल कमेटी के सदस्य है वोह इस सरकार में कानून मंत्री थे लेकिन तब इस देश में भ्रस्टाचार को नियंत्रित करने के लियें कानून या किसी विधेयक की बात नहीं हुई तब सभी को अपनी कुर्सी बचाने , अपनी राजनितिक पार्टी बनाने की लगी थी और उसी के बाद से देश में क्षेत्रीय दल बढ़े चुनावी खर्च बढ़ा मीडिया भ्रस्टाचार की चपेट में आने लगा और जो चोथा  स्तम्भ मिडिया इमाम्दार था उसमें भू रूपये और विज्ञापन लेकर खबरे छपने ,खबरें रोकने की बीमारी आ गयी चुनावी खर्च बढ़ गये देश में हंग लोकसभा ,हंग विधानसभाएँ आने लगी सरकार बनाने के लियें खरीद फरोख्त हुई ,भ्रस्टाचार बढ़ा और चुनावी खर्च आसमान पर पहुंच गया ...........................................................
इस चुनावी खर्च और लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधान लागू करने के लियें टी ऍन शेषन वरदान बन क्र आये और उन्होंने चुनाव का कानून क्या है जनता को पढाया ,नेताओं की कुर्सियां छीन  ली और भ्रष्ट बेईमान अधिकारीयों को बर्खास्त करवा दिया भ्रस्टाचार के खिलाफ शेषन अधिकारी की यह भी एक लड़ाई थी लेकिन नेताओं को यह मंजूर नहीं था और फिर शेषन हटे तो चुनाव आयुक्त के पर कतरे गये एक के स्थान पर तिन चुनाव आयुक्त बनाये गये और बहुमत से फेसला लिया जाएगा कानून बना दिया गया चुनाव आयुक्त सरकार की काफी हद तक कठपुतली बन गये ...................................
राजीव गाँधी जो मिस्त्र क्लीन कहे जाने लगे उन्होंने देश में भ्रस्टाचार की नब्ज़ को समझा और कहा ,खुलेआम कहा ,खुले आम स्वीकार करने का साहस किया के हमारे देश में सरकार जनता के लियें जो एक रुपया भेजती है उसमें से पचासी पेसे ही जनता तक पहुंच पाते है यह सच स्वीकार करने और इसके खिलाफ मुहीम छेड़ने का दंड उन्हें भ्रष्ट लोगों द्वारा चलाए गये आन्दोलन के कारण सरकार गंवा कर मिला . राजीव गांधी के खिलाफ बोफोर्स घोटाले का आरोप लगा लेकिन जिन लोगों ने आरोप लगाया था वोह जानते हैं के सत्ता में आने के बाद भी उनके पास राजीव के खिलाफ कोई सबूत नहीं था और इसीलियें वोह राजीव गाँधी के खिलाफ सत्ता में सात साल रहने के बाद भी कुछ नहीं कर सके राजीव के इस सच के बाद जहाँ सत्ता में आने वाले लोगों को भ्रस्टाचार रोकना चाहिए था वहां उन लोगों द्वारा आरक्षण आरक्षण और धर्म साम्प्रदायिकता का नंगा खेल खेला गया फिर देश में चंदे का हिसाब ,चुनाव का हिसाब .जेके,टाटा,बिरला,अम्बानी के हवाई जहाज़ों  में नेताओं के सफर चुनावी प्रचार होने लगे और वाही भ्रस्टाचार के खिलाफ बात करते हुए देखे गये .....................................
देश में नर्सिंग्घा राव के काल में जब मनमोहनसिंह  वित्त मंत्री थे तब सांसदों को रिश्वत लेकर खरीदा गया जिसे स्वीकार किया गया जाँच चली नतीजा सिफर,हवाला मामला हुआ देश में तरुण तेजपाल ने तहलका में खुलेआम भाजपा अध्यक्ष और सपा की सांसद को ताबूत खरीद और रक्षा सोदों में रिश्वत लेते हुए बताया गया इन नेताओं के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई कार्यवाही हुई तो खुद तरुण तेजपाल के खिलाफ जिसने इस घोटाले को उजागर किया  था जाँच हुई तरुण तेजपाल का कमरा रक्षा अधिकारीयों के कमरे में केसे पहुचा ,स्टिंग ओपरेशन के नाम पर रिश्वत केसे दी गयी और तरुण तेजपाल की बोलीत बंद कर दी गयी जनता का टेस्ट देखिये चुनाव के दिनों में खुलेआम छतीसगढ़ के जूदेव को रिश्वत लेते हुए टी वी पर बताया जाता है और चुनाव के दिनों में जनता को लगातार खुलेआम इस भ्रस्टाचार की कहानी प्रसारित की जाती है लेकिन इस रिश्वतखोर नेता के समर्थक मरने मारने पर उतारू हुए जूदेव को भगवान बताया गया और जिस जूदेव को जनता द्वारा जेल भेजने की बात करना चाहिए थी उसे चुनाव में वोट डालकर जिताया गया .....................
वर्तमान में कोंग्रेस की गठ्बन्धन सरकार में भाजपा के समर्थित ललित मोदी का भ्रस्टाचार सब जानते हैं ,कोंग्रेस का आदर्श सोसाइटी घोटाला,टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला,चीनी घोटाला ,काले धन का घोटाला और घोटाले ही घोटाले सामने आने लगे किसी में नेतिकता नहीं थे प्रधानमन्त्री खुद को बेबस और लाचार बता रहे थे तब एक योग गुरु स्वर्गीय राजीव दीक्षित के विचारों को आगे बढ़ते हुए देश में भ्रस्टाचार के खिलाफ खड़े हुए बाबा रामदेव ने रेली की ,बाबा रामदेव पर खुद भ्रस्टाचार के आरोप लगे लेकिन एक ताकत ,एक शक्ति थी योग गुरु में इसी  लियें   रेली सफल हुई और भ्रस्टाचार के खिलाफ जनता के दिल में बिगुल बजने लगा नतीजा अन्ना उठे और वोह फिर दिल्ली आये उन्होंने सरकार को चेताया केवल एक लोकपाल बिल के मसोदे इसे लागू करने की मांग को लेकर आन्दोलन किया गया अनशन किया गया सरकार हिली जनता अन्ना के साथ हुई पूरी जनता नहीं अगर पूरी जनता अन्ना के साथ होती तो पहले दिन यह मसोदा बन गया होता लेकिन कुछ तो हैं जो भ्रस्टाचार को जिंदा रखना चाहते हैं इसलियें वोह सरकार में दलाली कर रहे थे लेकिन अधिकतम लोग अन्ना की मुहीम के साथ थे बिल ड्राफ्ट करने  के लियें अधिसूचना जरी की गयी और जनता ने ऐसे जश्न मनाया मानो जनता ने देश से भ्रस्टाचार खत्म कर दिया हो लोकपाल विधेयक किया है इसमें किसको केसे सजा मिलने का प्रावधान है एक गाँव ,,एक ढाणी, एक नगरपालिका ,ज़िलाक्लेक्टर के स्तर पर भ्रस्टाचार अंकुश और सज़ा का क्या प्रावधान है सोचा नहीं और जश्न मना दिया अन्ना जिंदाबाद के नारे लगा दिए इसी बीच अन्ना पर भाई भतीजावाद को बढ़ावा देने के आरोप लगे अन्ना पर बेगुना लोगों को एंकाउन्टर करवाने वाले घोषित अपराधी नरेंद्र मोदी को आदर्श मुख्यमंत्री कहने पर अन्ना के खिलाफ अन्ना की सोच के खिलाफ आवाज़ उठने लगी ,योग गुरु ने ड्राफ्टिंग कमेटी में कुनबा परस्ती का आरोप लगाया तो कुनबा परस्तों ने योग गुरु की इस मामले में जरूरत होने से इनकार किया खुद योग गुरु ने बाद में जवाब दिया के योग से सद्बुद्धि आती है इसलियें योग की हर जगह जरूरत है इस लड़ाई को सभी पक्षों ने जिसमे भ्रष्ट पक्ष ,जमाखोर,मिलावटखोर ,बेईमानों ने अपने तरीके से इसका अर्थ निकाला वोह खुद भी इस लड़ाई में शामिल हुए लेकिन नेतिकता किसी में पैदा आज तक नहीं हो पायी है अख़बार में बयां देना फोटू छपवाना और चोपालों पर बाते करने के आलावा कुछ नहीं हो पा रहा हे होगा भी क्या अभी ड्राफ्टिंग चल रही हे इन्तिज़ार तो करने ही होगा .................................................
मुझे इन सब हालातों में एक लेखक की पुस्तक के कुछ अंश याद आ रहे हैं जिसमे उन्होंने लिखा था के अंग्रेजों ने आज़ाद भारत का जब सर्वेक्षण किया तो तीन बातें ख़ास तोर पर देश के हर नागरिक में पाई गयी पहली देश में प्रत्येक व्यक्ति चिक्तिसक है .. आप देख लें कोई भी किसी की तबियत पूंछने जाएगा उसका इलाज चाहे सबसे बढ़ा डोक्टर कर रहा हो लेकिन तीमारदारी करने वाला मरीज़ को कोई न कोई नुस्खा जरुर बता कर आयेगा ..दूसरी बात पूरा भारत कही भी मूत्र और शोच करने के लियें स्वतंत्र है उसे कोई रोकने वाला नहीं है .तीसरी प्रमुख बात यह थी के पूरा देश यानी देश का हर नागरिक का नारा हे में इमानदार  और पूरा देश बेईमान ...बस हर व्यक्ति खुद को ईमानदार  समझ कर दुसरे को बेईमान कहता है और इसी लियें देश में भ्रस्टाचार के कारण निवारण का फार्मूला इसका सच बाहर नहीं आ रहा है ........................................................
अब हम भ्रस्टाचार रोकने के लियें बने कानून लोकपाल बिल की बात करते हैं दोस्तों सब जानते है देश में कानून प्रभावशाली लोगों द्वारा कचरे में डाल दिए जाते हैं आम आदमी की तो छोड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना नहीं होती है ..देश में चोरी करने,हत्या करने,बलात्कार करने ,बेईमानी करने सहित सभी अपराधों के कानून बने हुए है लेकिन फिर भी रोज़ अपराध होते हैं रोज़ हत्या,लुट,बलात्कार होते हैं ,,देश की सुप्रीम कोर्ट प्रधानमन्त्री जी से काले धन रखने वालों की सूची सार्वजनिक करने के लियें दर्जनों बार आदेश देकर कहती है लेकिन देश के सर्वोच्च न्यायलय की सुनवाई प्रधानमन्त्री नहीं करते हैं कहते हैं इससे देश के सम्बन्धो पर गलत असर पढ़ेगा तो दोस्तों कानून से अगर अपराध खत्म होते तो आज देश अपराध मुक्त होता , मुस्लिम कानून में चोरी की सजा हाथ काटना है अपराधी को सरे आम लोगों को एकत्रित  कर चोरी की सज़ा देने के लियें उनके हाथ काटे जाते हैं एक तरफ चोरी के घोषित अपराधी के हाथ काटे जाते हैं और दूसरी तरफ उसी भीड़ में किसी की घड़ी किसी का पर्स चोरी कर लिया जाता है तो जनाब कानून एक अपराध को रोकने और दंड देने का अस्थायी माध्यम है इसे अपराध और भ्रस्टाचार को अगर रोकना है तो इसके लियें हमें खुद अपने जमीर को जगाना होगा नेतिकता को ज़िंदा करना होगा आज में वकील होने के नाते रोज़ देखता हूँ एक व्यक्ति खुद को ईमानदार कह कर एक अधिकारी को दो पांच हजार की रिश्वत लेते हुए पकडाता है लेकिन जब अदालत में बयान देने आता है तो यही फरियादी मुलजिम से मोटी रकम लेकर कहता है के हमने तो ख़ाली कागज़ पर जेसा पुलिस ने कहा ऐसे हस्ताक्षर कर दिए थे और इसीलियें मुलजिम बरी हो जाते हैं ......................
कुल मिलाकर भ्रस्टाचार को खत्म करने के लियें देश में कानून से ज्यादा नेतिकता की जरूरत है और वोह नेतिकता आरोप प्रत्यारोप से जन्म नहीं लेगी हमारी विचारधारा में इमानदार और सारा देश बेईमान से नेतिकता पैदा नहीं होगी , जापान में एक भारतीय ने जापानी महिला से विवाह रचाया महिला का जापान में देरी का व्यवसाय था वहां भारतीय ने दूध में पानी मिलाना शुरू किया तो जापानी पत्नी ते भारतीय पति को टोका और कहा के दूध ताकत देता है और हमारी तुम्हारी राष्ट्रीयता, नेतिकता में फर्क है यहाँ मिलावट बेईमानी नहीं चलेगी लेकिन भारतीय पति तो भारतीय था उसने दुसरे दिन फिर दूध में पानी मिलागा बस इस जापानी पत्नी ने अपने देश को बचाने के लियें इस भारतीय नेतिक्ताविहीन पति से तलाक लेने एक लियें जापान न्यायालय में याचिका दायर की और उसे वहन से तलाक मिली , आज हमारे देश में अगर कर्मचारी दफ्तर से घर पहुंचता है तो पत्नी उसकी जेब यह सोच कर टटोलती है के ऊपर की कमाई कितनी हुई निचे से लेकर ऊपर तक प्रत्येक व्यक्ति में आप सभी लोग कहीं न कहीं किसी ना किसी रूप में भ्रस्टाचार ,बेईमानी में लिप्त है इसलियें दूसरों के गिरेबान में झाँकने से पहले हमें खुद अपने गिरेबान में झांकना होगा पहले खुद को इमादारी का पाठ पढना होगा राष्ट्रभक्ति का पाठ पढना होगा और फिर घर, परिवार,दोस्त से लेकर समाज तक इस संदेश को लेजाना होगा , अन्ना की भ्रस्टाचार के खिलाफ लड़ाई में बहुत बहुत देर से उठाया गया एक अच्छा कदम है और इस चिंगारी को हमें जलाए रखना है ताकि भ्रस्टाचार राख हो जाए लेकिन सावधानीपूर्वक क्योंकि इस सच को भी स्वीकार कर ले के देश में अन्ना की चिंगारी को कुछ लोग आग भभकने से पहले राख कर देने की कोशिशों में जुट गए हैं और सही में अगर हम देश से भ्रस्टाचार दूर करना चाहते हैं तो कानून तो अपनी जगह है ,बिल विधेयक अपनी जगह है लेकिन नेतिकता , राष्ट्रीयता की चिंगारी जो अन्ना ने हमारे दिलों में जलाई है उससे हमें खुद की नेतिकता को जगाना होगा क्योंकि हालातों में एक अन्ना बारबार कुछ नहीं कर सकेगा हमें इस लड़ाई को जितने के लियें हमारे अपने अन्दर अपने सीने में अपने विचारों में एक अन्ना को जन्म देना होगा क्योंकि एक अरब इक्कीस करोड़ लोगों को हमें अन्ना बनाना है हर घर में अन्ना पैदा करना है तब कहीं हमारा देश भ्रस्टाचार से मुक़ाबला कर सकेगा अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर इंदिरा,गाँधी,जयप्रकाश.राजीवगांधी के वक्त पर भ्रस्टाचार के खिलाफ लडी गयी लड़ाई की तरह यह लड़ाई भी राजनीति और अख़बारों के विज्ञापन रूपये लेकर खबर छापने जेसे भ्रस्टाचार की भेंट चढ़ जायेगी इसलियें दोस्तों खुद उठो दिल में अन्ना की पुकार एक अन्ना समा लोग और भ्रस्टाचार के खिलाफ मशाल लेकर अपने घर ,अपने परिवार से ही निकल चलो इस जद में जो भी आये चाहे वोह अपना बाप हो ,भाई हो ,दोस्त हो सभी को जलाते चलो जलाते चलो और इस देश को बचाने का जो वक्त आया है जो माहोल बना है उसका फायदा उठा कर इस देश को बचा लो इस देश को बचा लो .......... अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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1 टिप्पणियाँ:

Dr. shyam gupta ने कहा…

"आज हमारे देश में अगर कर्मचारी दफ्तर से घर पहुंचता है तो पत्नी उसकी जेब यह सोच कर टटोलती है के ऊपर की कमाई कितनी हुई -"
---यही आज का सबसे सुन्दर जुमला है--कारणों का कारण...

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