नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

Home » » "मुठीयन भर बाल नोच मार देत पैयाँ"

"मुठीयन भर बाल नोच मार देत पैयाँ"

Written By Surendra shukla" Bhramar"5 on गुरुवार, 7 अप्रैल 2011 | 3:12 pm



आइये आप को हम अपने दर्द से अलग आज बाल- झरोखा दिखाएँ बाल रस हम सब के मन में समां जाये हम बच्चे सा सच्चा मन ले निःस्वार्थ नाच कूद मिल जुल , कभी झगड़ भी पड़ें अगर तो फिर मिल जाएँ   



"मुठीयन  भर बाल नोच मार देत पैयाँ"  
टुकुर टुकुर ताकि मातु ममता की छैंया


                                   ( फोटो साभार और धन्यवाद के साथ अन्य स्रोत से लिया गया )
किलकि किलकि रोय उठत देखि परछैयां
कबहुं हंसत फिर रिसात लेत ना कनैयां
चीख सुन दौड़ धाय लेत माँ बलैंया
गोद में लुकाय ढाकि आँचरा कि छैयां
गाई गान सुधा पान हरषि हरषि मैया
कोष देत सब लुटाई नाचत अंग्नैया
सो जा ललन लोरी गाई  रही मैया
नटखट वो पलक मूँद -झूंठ- लरकैयां
"मुठीयन  भर बाल नोच मार देत पैयाँ"  
 छनकत कंगना कबहु छनकी पैजनिया
मोहि लेत- बूँद छलकि जात भरी अँखियाँ
उमड़-घुमड़-प्रीति-प्यार-बादरा कि नैंया
खेल रही माँ बिभोर लरकन कि नैया
लहर -लहर -ह्रदय-सिन्धु-चूमि के कलईया 
चूमि मुख गात चूमि पागल सी मैया 
नजर से लुका छिपाई उर में भरत मैया 
कजरा-नैनो मी झाँकि माथ टीकि  पैंया 
"भ्रमर' ख्वाब अंक भरे खोयी हुयी रनिया
खोलि मुख चूमि दोउ नाच -बनी-बतियाँ . 

सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५
..२०११
(लेखन ..१९९६ हजारीबाग झारखण्ड)
Share this article :

2 टिप्पणियाँ:

हरीश सिंह ने कहा…

sundar rachna.

Surendrashukla Bhramar-सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर५ ने कहा…

आदरणीय हरीश जी प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद आप की जागरूकता हिंदी को बढ़ावा देने हेतु और हर जगह आप की उपस्थिति सचमुच काबिले तारीफ हैं-शुभ कामनाएं
Bhramar5

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your valuable comment.