नियम व निति निर्देशिका::: AIBA के सदस्यगण से यह आशा की जाती है कि वह निम्नलिखित नियमों का अक्षरशः पालन करेंगे और यह अनुपालित न करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से AIBA की सदस्यता से निलम्बित किया जा सकता है: *कोई भी सदस्य अपनी पोस्ट/लेख को केवल ड्राफ्ट में ही सेव करेगा/करेगी. *पोस्ट/लेख को किसी भी दशा में पब्लिश नहीं करेगा/करेगी. इन दो नियमों का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य है. द्वारा:- ADMIN, AIBA

Home » » राष्ट्र चेतना

राष्ट्र चेतना

Written By Vibhor Gupta on शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011 | 1:32 pm

कवियों अपनी कलम उठाओ
आया समय, कुछ गीत लिखो,
भ्रष्टाचार विरोधी स्वर लिखकर
'अन्ना' के संग मीत लिखो

जाग उठे जन-जन, जागे जन-गण-मन,
राष्ट्र चेतना जगाने को एक जाग चाहिये
धधक उठे क्रान्ति-ज्वाला  जन-जन में,
मिटाने अंधियारे को, दावानल आग चाहिये
राष्ट्र्भक्ति के स्वर लिये, क्रान्ति का ज्वर लिये,
परिवर्तन की आंधियों को, भैरवी राग चाहिये
पुकारे है गंगा मैली, कर डाली मुझे विषैली,
ऐसे सांप-सपोलो को डसने को, शेषनाग चाहिये
Share this article :

2 टिप्पणियाँ:

Dilbag Virk ने कहा…

bharshtachaar ke virodhi har shakhs ka sath dena jroori hai
dekhie nyay sarkar ka

Vibhor Gupta ने कहा…

dilbag ji, aapne bilkul sahi kaha, hame bharastachar ke virodhiyo ka sath dena chahiye..

एक टिप्पणी भेजें

Thanks for your valuable comment.