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शौच

Written By Brahmachari Prahladanand on शुक्रवार, 15 जुलाई 2011 | 4:06 pm

योग के नियम का पहला अंग है शौच |

शौच और सोच दोनों एक ही तरह से हैं |

शौच करने जब कोई जाता है तभी वह सोचता भी है |

शौच करने के समय उसको बहुत से सोच आते हैं |

और जब गाँव में शौच करने जाते हैं तो कोई

कहीं बैठा होता है और कोई कहीं बैठा होता है |

तो उस समय जो चर्चा होती है उसी चर्चा को

गुफ्तगु कहते है यानी गु (शौच ) करते समय की गयी चर्चा |

और यह गुफ्तगु बहुत ही महत्तवपूर्ण होती है |

तो शौच और सोच तथा गुफ्तगु यह जीवन में बहुत मायने रखते हैं |

कई लोग तो शौच करते हुए ही अपने सारे दिन का प्लान सोच लेते हैं |

और वह प्लान भी अच्छा होता है |

और अक्सर अच्छे-अच्छे प्लान शौच में ही आते हैं |

इसलिए अक्सर लोग शौच में घुसे रहते हैं |
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3 टिप्पणियाँ:

रविकर ने कहा…

achchhi prastuti
sochne ka sabse sahi aakalan

ORISON ने कहा…

शरीर में से जब गंदगी निकल जाती है | तो शरीर शुद्ध और मन भी शुद्ध हो जाता है | तभी शायद व्यक्ति में अच्छे-अच्छे विचार आते हैं |

vidhya ने कहा…

achchhi prastuti
sochne ka sabse sahi aakalan

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