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चुनों अपनी राहें

Written By Minakshi Pant on शनिवार, 9 जुलाई 2011 | 12:09 am

सरल बिलकुल सरल है वो ,
उसके गीत गाने को मत मचलना |
अगर जान लो की संगीत है वो ,
तो सुर सजाने को मत निकलना |
तुम्हारे जो सपने हैं ,
उठो उन सपनों के संग |
अपने इस पवित्र हृदय को तुम ,
किसी गर्द में मत डुबोना |
इस छोटे से मन को ,
छोटी - छोटी आशाओं से सजाना |
ज्यादा की चाहत में ,
थोडा भी मत गंवाना  |
अपने प्यारे एहसासों से ,
दुसरे के दिल में जगह बनाना |
अपने सपनों को मोड़ देकर ,
सुदूर भविष्य के सपने सजाना |
जिंदगी तो रोज नई है ,
एक नये ख्वाब की गुज़ारिश करती है |
देखो रोज नये सपने बुन 
तुम उस राह में मत निकलना |
वो शाम ढलते ही 
फिर  से नये की दरकार करती है |
उसकी शर्तों पर न चलकर 
अपनी राह चुनना |
देखो ... जिंदगी के पीछे न भाग ...
बस एक ख्वाब ही चुनना |
उसी को सजाकर फिर ...
उसे  तुम साकार करना |
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2 टिप्पणियाँ:

ana ने कहा…

kavia me ek sahaj pravah hai....dil ko chhoo gayi

Minakshi Pant ने कहा…

shukriya dost :)

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